विस्तृत उत्तर
जप माला में १०८ मनकों के ऊपर एक बड़ा मनका होता है, जिसे 'सुमेरु' कहते हैं। सुमेरु को गुरु, ईश्वर या ब्रह्मांड के केंद्र का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सुमेरु को लांघना गुरु या परमात्मा का अनादर माना जाता है। सुमेरु तक पहुँचने का अर्थ है कि एक माला (१०८ जप) पूर्ण हो गई। यहाँ पहुँचकर साधक को सुमेरु को मस्तक से लगाना चाहिए और फिर माला को पलटकर वापस जप शुरू करना चाहिए। इसे न पार करने का नियम साधक में अनुशासन और विनम्रता पैदा करता है, साथ ही यह जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति की मर्यादा को भी दर्शाता है।





