विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, बिस्तर को विश्राम और तामसिक क्रियाओं का स्थान माना गया है। इसलिए, बिस्तर पर बैठकर विधि-विधान से 'अनुष्ठान' या 'गुरु मंत्र' का जप करना वर्जित है, क्योंकि इससे मंत्र की शक्ति का ह्रास होता है और साधक को दोष लग सकता है। हालांकि, आधुनिक संतों (जैसे प्रेमानंद जी महाराज) के अनुसार, भगवान का 'नाम जप' (जैसे राम-राम, कृष्ण-कृष्ण) किसी भी समय और स्थान पर किया जा सकता है, यहाँ तक कि बिस्तर पर भी। नियम यह है कि यदि आप किसी विशेष फल के लिए मंत्र जप रहे हैं, तो भूमि पर आसन बिछाकर बैठें, लेकिन यदि आप प्रेम और भक्तिवश स्मरण कर रहे हैं, तो स्थान का बंधन नहीं है।





