विस्तृत उत्तर
कठोर तप और जप से अर्जित की गई आध्यात्मिक ऊर्जा को शरीर में रोककर रखना साधना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। ऊर्जा को बिखरने से रोकने के लिए कुछ कड़े नियम हैं।
कुचालक आसन — सबसे पहला नियम विद्युत कुचालक आसन (जैसे कुशा या ऊन) का प्रयोग है। जमीन पर सीधे बैठने से पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति सारी अर्जित ऊर्जा को सोख लेती है।
जल स्पर्श विधि — जप पूरा होने के बाद एकदम से आसन से नहीं उठना चाहिए। अपनी जगह पर बैठे रहकर आचमनी से जल की कुछ बूंदें आसन के नीचे भूमि पर गिराएं और उसे अपने मस्तक तथा नेत्रों से लगाएं।
ईश्वर को अर्पण — ऊर्जा को सुरक्षित रखने के लिए जप के तुरंत बाद क्रोध या निंदा से बचें। अंत में 'तत्सर्वं ब्रह्मार्पणमस्तु' कहकर अपना सारा जप भगवान के चरणों में अर्पित कर दें, जिससे पुण्य सुरक्षित हो जाता है।





