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जप आसन📜 पतंजलि योगसूत्र, मंत्र महोदधि, हठयोग प्रदीपिका, तंत्र शास्त्र3 मिनट पठन

मंत्र जप करते समय कौन सा आसन सही है?

संक्षिप्त उत्तर

जप के लिए पद्मासन सर्वोत्तम है। सुखासन (पालथी) और सिद्धासन भी उत्तम हैं। रीढ़ सीधी रखना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। कुश या ऊनी आसन पर बैठें — भूमि पर सीधे नहीं। बैठते समय 'ॐ आसनाय नमः' बोलें।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप के लिए आसन का महत्व पतंजलि योगसूत्र और मंत्र महोदधि में विस्तार से वर्णित है:

पतंजलि का सूत्र

> 'स्थिरसुखमासनम्' (योगसूत्र 2.46)

— जो आसन स्थिर और सुखपूर्ण हो वही उत्तम आसन है।

जप के लिए सर्वश्रेष्ठ आसन

1पद्मासन (Lotus Pose) — सर्वोत्तम

दोनों पैर एक-दूसरे की जाँघ पर रखें। रीढ़ एकदम सीधी।

  • फायदे: मन सर्वाधिक एकाग्र होता है, ऊर्जा ऊपर की ओर प्रवाहित होती है
  • कठिनाई: नए साधकों को कठिन

2सिद्धासन — साधकों के लिए श्रेष्ठ

एक पैर की एड़ी मूलाधार पर, दूसरा पैर ऊपर।

  • योग शास्त्र में इसे 'मुनियों का आसन' कहा गया है
  • कुंडलिनी साधना के लिए उत्तम

3सुखासन — सामान्य साधकों के लिए

साधारण पालथी। रीढ़ सीधी रखें।

  • सरल और सुविधाजनक
  • दीर्घ जप के लिए उत्तम

4वज्रासन — एकमात्र भोजन के बाद भी उचित

घुटने मोड़कर पंजों पर बैठें।

  • पाचन में सहायक
  • यदि अन्य आसन संभव न हों

5कुर्सी पर बैठकर (अपरिहार्य स्थिति में)

यदि स्वास्थ्य कारण से भूमि पर न बैठ सकें तो कुर्सी पर रीढ़ सीधी रखकर जप करें।

आसन सामग्री — कुश और ऊनी आसन का महत्व

| आसन | गुण | उद्देश्य |

|------|-----|----------|

| कुश (Darbha grass) | पृथ्वी की ऊर्जा संग्रह | ब्राह्मण जप, वेद पाठ |

| ऊनी आसन | शरीर की ऊर्जा नहीं जाने देता | तंत्र, मंत्र साधना |

| मृगचर्म (हिरण की खाल) | वैदिक परंपरा में श्रेष्ठ | उच्च साधना |

| काला कंबल | भूमि से इंसुलेशन | गृहस्थ साधना |

| कपास का आसन | सात्विक | सामान्य पूजन |

भूमि पर सीधे न बैठें — क्यों

शास्त्र में कहा गया है कि भूमि से सीधे संपर्क में बैठने पर जप की ऊर्जा भूमि में चली जाती है। आसन ऊर्जा को शरीर में बनाए रखता है।

सही बैठने की स्थिति

  1. 1रीढ़ सीधी — सर्वाधिक महत्वपूर्ण
  2. 2कंधे ढीले
  3. 3हाथ घुटनों पर या ज्ञान मुद्रा में
  4. 4सिर थोड़ा झुका हुआ
  5. 5आँखें अर्धबंद या बंद

हाथ की मुद्राएं (जप के दौरान)

  • ज्ञान मुद्रा: अंगूठा और तर्जनी मिलाएं — ज्ञान और एकाग्रता
  • चिन मुद्रा: ज्ञान मुद्रा + हथेली ऊपर — ऊर्जा ग्रहण
  • ध्यान मुद्रा: दोनों हाथ गोद में, दाहिना ऊपर — ध्यान

आसन का मंत्र

आसन पर बैठते समय पहले आसन की पूजा करें:

> 'ॐ आसनाय नमः' — आसन पर बैठते हुए बोलें

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शास्त्रीय स्रोत
पतंजलि योगसूत्र, मंत्र महोदधि, हठयोग प्रदीपिका, तंत्र शास्त्र
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