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साधना आसन📜 तंत्र शास्त्र, मंत्र महोदधि, कुलार्णव तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना में कौन सा आसन उपयोग करें?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र आसन: मृगचर्म (सर्वश्रेष्ठ), व्याघ्रचर्म (भैरव), कुश (सामान्य)। मुद्रा: सिद्धासन (तंत्र ध्यान), पद्मासन (कुंडलिनी), वीरासन (भैरव)। भूमि पर सीधे नहीं। कुलार्णव: 'आसने सिद्धे सिद्धिः।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना में आसन का नियम कुलार्णव तंत्र और तंत्र शास्त्र में वर्णित है:

तंत्र में विशेष आसन

| आसन | साधना प्रकार |

|-----|-------------|

| मृगचर्म | शिव-शक्ति साधना — तंत्र में सर्वश्रेष्ठ |

| व्याघ्रचर्म | भैरव-काली साधना |

| कुश आसन | सर्वसुलभ |

| ऊनी कंबल | सामान्य तंत्र |

| रेशमी आसन | उच्च तंत्र |

बैठने की मुद्रा

  1. 1सिद्धासन — तंत्र ध्यान के लिए सर्वोत्तम
  2. 2पद्मासन — कुंडलिनी साधना
  3. 3वीरासन — भैरव साधना
  4. 4शवासन — कुछ तांत्रिक ध्यान विधियों में

अनिवार्य

भूमि पर सीधे न बैठें — आसन अनिवार्य है। भूमि की ऊर्जा साधना शक्ति को absorb कर लेती है।

कुलार्णव

आसने सिद्धे सिद्धिः।' — एक ही आसन पर नित्य बैठने से आसन सिद्ध होता है।
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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, मंत्र महोदधि, कुलार्णव तंत्र
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