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ऊर्जा संरक्षण से जुड़े सभी प्रश्न(5)

ऊर्जा संरक्षण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

ऊर्जा संरक्षण

मंत्र की ऊर्जा को शरीर में कैसे रखें

कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करें, जप के बाद आसन के नीचे जल गिराकर मस्तक पर लगाएं और अंत में सारा जप ईश्वर को अर्पित कर दें ताकि ऊर्जा बिखरने न पाए।

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मंत्र जप नियम

मंत्र जपते समय सिर ढंकना जरूरी है क्या

मंत्र जप के दौरान उत्पन्न आध्यात्मिक ऊर्जा को शरीर में सुरक्षित रखने और इष्ट देव के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए सिर ढंकना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

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नवरात्रि के नियम और निषेध

नवरात्रि में ब्रह्मचर्य क्यों जरूरी है?

नवरात्रि में ब्रह्मचर्य = आध्यात्मिक ऊर्जा के संरक्षण और कुंडलिनी जागरण के लिए अनिवार्य। कलह, ईर्ष्या, क्रोध, काम, निंदा — ये तपस्या की ऊर्जा क्षीण करते हैं। शरीर, मन और वातावरण में पूर्ण शुद्धता।

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जप का स्थान, समय, आसन और माला

जप के लिए कुशा आसन क्यों प्रयोग करते हैं?

कुशा विद्युत की कुचालक (Insulator) है — जप से उत्पन्न आध्यात्मिक और विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा को पृथ्वी में प्रवाहित (Grounding) होने से रोकती है, जिससे वह ऊर्जा साधक के शरीर में संचित रहती है।

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मंत्र जप

मंत्र जप के दौरान कौन सा आसन उपयोग करें?

जप के लिए: सिद्धासन (सर्वोत्तम — ऊर्जा ऊर्ध्वगामी), पद्मासन (द्वितीय), सुखासन (सामान्य)। नीचे: ऊनी कम्बल/कुशासन (प्लास्टिक वर्जित)। रीढ़ सीधी, माला गोमुखी में। पातञ्जल: स्थिर और सुखद आसन। पूरे अनुष्ठान में एक ही आसन।

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