विस्तृत उत्तर
जप के लिए 'कुशा' (एक प्रकार की पवित्र घास) से बने आसन का प्रयोग शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कुशा विद्युत की कुचालक (Insulator) होती है। मंत्र जप के दौरान साधक के शरीर में जो उच्च आध्यात्मिक और विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा (Bio-electricity) उत्पन्न होती है, कुशा का आसन उस ऊर्जा को पृथ्वी में प्रवाहित (Grounding) होने से रोकता है, जिससे वह ऊर्जा साधक के शरीर में ही संचित रहती है।





