विस्तृत उत्तर
जप करते समय साधक का मुख सदैव पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
पूर्व दिशा ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत सूर्य की दिशा है, जबकि उत्तर दिशा को कुबेर और देवताओं की दिशा माना गया है।
जप में मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा में होना चाहिए — पूर्व = सूर्य की दिशा (ज्ञान, प्रकाश, सकारात्मक ऊर्जा); उत्तर = कुबेर और देवताओं की दिशा।
जप करते समय साधक का मुख सदैव पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
पूर्व दिशा ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत सूर्य की दिशा है, जबकि उत्तर दिशा को कुबेर और देवताओं की दिशा माना गया है।
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको जप का स्थान, समय, आसन और माला से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।