विस्तृत उत्तर
चन्द्रदोष विशिष्ट: चूंकि चन्द्रमा वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) और उत्तर दिशा से संबंधित है, अतः चन्द्रदोष निवारण के लिए संभव हो तो उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके पाठ करना विशेष लाभकारी होता है, विशेषकर पूर्णिमा की रात्रि में।
चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में मुख करके पाठ करें — विशेषकर पूर्णिमा की रात्रि में यह विशेष लाभकारी है।
चन्द्रदोष विशिष्ट: चूंकि चन्द्रमा वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) और उत्तर दिशा से संबंधित है, अतः चन्द्रदोष निवारण के लिए संभव हो तो उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके पाठ करना विशेष लाभकारी होता है, विशेषकर पूर्णिमा की रात्रि में।
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