तिथि शास्त्रपूर्णिमा को कौन से काम शुभ?पूर्णिमा=पूर्ण चंद्र। शुभ: सत्यनारायण, व्रत, दान, पूजा, गंगा स्नान, तीर्थ। गृहप्रवेश/विवाह कुछ में वर्जित। भक्ति+दान+साधना दिन।#पूर्णिमा#शुभ#व्रत
देवी पूजा नियमदेवी की पूजा पूर्णिमा को करें या अमावस्या को?सौम्य (लक्ष्मी/सरस्वती) = पूर्णिमा। उग्र (काली/छिन्नमस्ता) = अमावस्या। सर्वोत्तम = अष्टमी/नवमी। नवरात्रि 9 दिन। दीपावली अमावस्या = काली+लक्ष्मी दोनों।#पूर्णिमा#अमावस्या#देवी
शिव पूजा नियमशिव पूजा में अमावस्या और पूर्णिमा में कौन सा दिन श्रेष्ठ है?अमावस्या > पूर्णिमा (शिव = संहारक, अंधकार)। किन्तु सर्वश्रेष्ठ = चतुर्दशी (शिवरात्रि)। पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा (शिव=आदि गुरु), श्रावण पूर्णिमा शुभ। शिव = काल से परे — कोई भी तिथि शुभ।#अमावस्या#पूर्णिमा#श्रेष्ठ
लोकअष्टमी पर पूर्णिमा पितर का श्राद्ध कर सकते हैं?हाँ, छूटने पर अष्टमी विकल्प है।#पूर्णिमा#अष्टमी#श्राद्ध विकल्प
शुभ मुहूर्तमाँ त्रिपुर सुंदरी की साधना कब करनी चाहिए?माँ त्रिपुर सुंदरी साधना का शुभ काल: शुक्रवार = विशेष शुभ। गुप्त नवरात्रि और पूर्णिमा भी उपयुक्त। अन्य शुभ तिथियों पर भी साधना की जा सकती है।#त्रिपुर सुंदरी मुहूर्त#शुक्रवार#गुप्त नवरात्रि
पाठ विधि और नियमचन्द्रदोष निवारण के लिए कौन सी दिशा में बैठकर पाठ करें?चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में मुख करके पाठ करें — विशेषकर पूर्णिमा की रात्रि में यह विशेष लाभकारी है।#चन्द्रदोष दिशा#उत्तर दिशा#वायव्य
पाठ विधि और नियमचन्द्रदोष निवारण के लिए चन्द्रशेखराष्टकम् कब पढ़ें?चन्द्रदोष निवारण के लिए सोमवार प्रदोष काल, पूर्णिमा, महाशिवरात्रि और श्रावण सोमवार पर चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ विशेष फलदायी है।#चन्द्रदोष निवारण#पूर्णिमा#सोमवार
पाठ विधि और नियमचन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?चन्द्रशेखराष्टकम् सोमवार को प्रदोष काल में करें। विशेष फल के लिए पूर्णिमा, महाशिवरात्रि और श्रावण मास के सोमवार पर पाठ करें।#पाठ समय#प्रदोष काल#सोमवार
काल निर्णयसत्यनारायण पूजा के लिए सबसे शुभ दिन (तिथि) कौन सा है?सत्यनारायण पूजा के लिए 'पूर्णिमा' (पूर्णमासी) का दिन सबसे शुभ माना जाता है। वह दिन चुनना चाहिए जब शाम के समय (गोधूलि बेला) पूर्णिमा तिथि मौजूद हो।#पूर्णिमा#प्रदोष व्यापिनी#तिथि निर्णय
ध्यान अनुभवपूर्णिमा की रात ध्यान करने का क्या विशेष लाभ है?पूर्णिमा ध्यान: चन्द्र ऊर्जा चरम (मन शांत), सत्त्व प्रधान, पिनियल ग्रंथि (मेलाटोनिन), भावनात्मक शुद्धि (ज्वार-भाटा), बुद्ध=पूर्णिमा बोधि। शरद/गुरु/बुद्ध पूर्णिमा=सर्वश्रेष्ठ।#पूर्णिमा#ध्यान#चन्द्रमा
व्रत विधिपूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा करने का क्या विधान है?सत्यनारायण: पूर्णिमा=शुभ तिथि, विष्णु सत्य स्वरूप। विधि: षोडशोपचार→कथा (5 अध्याय, अनिवार्य)→आरती→प्रसाद (शीरा+केला)। प्रसाद अस्वीकार न करें। अवसर: नया कार्य, गृह प्रवेश, मनोकामना। सरलतम गृहस्थ पूजा।#सत्यनारायण#पूर्णिमा#विष्णु
तंत्र साधनातंत्र में पूर्णिमा और अमावस्या की साधना में क्या भेद हैपूर्णिमा = सौम्य/सात्विक: प्रकाश, शान्ति, ज्ञान, विष्णु/लक्ष्मी/गुरु। अमावस्या = उग्र/तामसिक: अन्धकार, गोपनीय शक्ति, काली/भैरव, पितृ। दीपावली = सबसे शक्तिशाली अमावस्या। पूर्णिमा = सभी, अमावस्या = उन्नत/दीक्षित। दोनों में सात्विक जप-ध्यान शुभ।#पूर्णिमा#अमावस्या#तंत्र
व्रतपूर्णिमा व्रत कैसे रखें और पूजा कैसे करेंपूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान → संकल्प → निराहार/फलाहार/एकभुक्त। पूजा: गणपति → सत्यनारायण/विष्णु → रात्रि चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → सत्यनारायण कथा → दान। विशेष: गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा।#पूर्णिमा#व्रत#चन्द्र
पूजा विधिसत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों करते हैंसत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों: (1) स्कन्द पुराण में शुक्ल पक्ष/पूर्णिमा विधान। (2) पूर्णिमा = विष्णु की तिथि, पूर्णता-सम्पन्नता प्रतीक। (3) शुक्ल पक्ष चरम = सर्वाधिक शुभ। (4) मासिक नियमितता सुविधाजनक। अन्य दिन भी मान्य: एकादशी, संक्रान्ति, शुभ अवसर।#सत्यनारायण#पूर्णिमा#विष्णु
पूजा विधिसत्यनारायण पूजा में कलश स्थापना कैसे करेंकलश स्थापना: चौकी पर अक्षत → ताँबे का कलश → शुद्ध जल + गंगाजल + तुलसी + दूर्वा + सुपारी + सिक्का → 'कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से पूजन → 5 आम पत्ते मुख पर → नारियल (रोली-चन्दन-मौली सहित) ऊपर → कलश के गले में मौली। कलश = ब्रह्माण्ड का प्रतीक।#सत्यनारायण#कलश स्थापना#विष्णु