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व्रत📜 धर्मसिन्धु, व्रत कथा संग्रह, सामान्य व्रत परम्परा2 मिनट पठन

पूर्णिमा व्रत कैसे रखें और पूजा कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

पूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान → संकल्प → निराहार/फलाहार/एकभुक्त। पूजा: गणपति → सत्यनारायण/विष्णु → रात्रि चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → सत्यनारायण कथा → दान। विशेष: गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा।

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विस्तृत उत्तर

पूर्णिमा व्रत प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि पर रखा जाता है। यह चन्द्रमा और भगवान विष्णु/सत्यनारायण को समर्पित है।

व्रत कैसे रखें

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • संकल्प लें: 'मैं आज पूर्णिमा व्रत रखता/रखती हूँ।'
  • निराहार (निर्जला) या फलाहार व्रत — अपनी सामर्थ्य अनुसार।
  • एक समय भोजन (एकभुक्त) भी मान्य।
  • रात्रि में चन्द्रमा उदय होने पर चन्द्र दर्शन और अर्घ्य।
  • चन्द्र दर्शन के बाद व्रत पारण (कुछ परम्पराओं में)।

पूजा विधि

  1. 1स्नान के बाद पूजा स्थल पर बैठें।
  2. 2गणपति पूजन।
  3. 3सत्यनारायण (विष्णु) की पूजा — पीले फूल, तुलसी, फल, मिठाई।
  4. 4चन्द्रमा का पूजन — रात्रि में चन्द्र उदय पर जल/दूध अर्पित।
  5. 5सत्यनारायण कथा पाठ या श्रवण (पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा की परम्परा)।
  6. 6दीपदान — विशेषकर कार्तिक, माघ पूर्णिमा पर।
  7. 7ब्राह्मण भोजन और दान।

विशेष पूर्णिमाएँ

गुरु पूर्णिमा (आषाढ़), रक्षाबन्धन (श्रावण), शरद पूर्णिमा (आश्विन), कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा — इनका विशिष्ट महत्व।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिन्धु, व्रत कथा संग्रह, सामान्य व्रत परम्परा
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