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पूर्णिमा — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 8 प्रश्न

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देवी पूजा नियम

देवी की पूजा पूर्णिमा को करें या अमावस्या को?

सौम्य (लक्ष्मी/सरस्वती) = पूर्णिमा। उग्र (काली/छिन्नमस्ता) = अमावस्या। सर्वोत्तम = अष्टमी/नवमी। नवरात्रि 9 दिन। दीपावली अमावस्या = काली+लक्ष्मी दोनों।

पूर्णिमाअमावस्यादेवी
शिव पूजा नियम

शिव पूजा में अमावस्या और पूर्णिमा में कौन सा दिन श्रेष्ठ है?

अमावस्या > पूर्णिमा (शिव = संहारक, अंधकार)। किन्तु सर्वश्रेष्ठ = चतुर्दशी (शिवरात्रि)। पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा (शिव=आदि गुरु), श्रावण पूर्णिमा शुभ। शिव = काल से परे — कोई भी तिथि शुभ।

अमावस्यापूर्णिमाश्रेष्ठ
ध्यान अनुभव

पूर्णिमा की रात ध्यान करने का क्या विशेष लाभ है?

पूर्णिमा ध्यान: चन्द्र ऊर्जा चरम (मन शांत), सत्त्व प्रधान, पिनियल ग्रंथि (मेलाटोनिन), भावनात्मक शुद्धि (ज्वार-भाटा), बुद्ध=पूर्णिमा बोधि। शरद/गुरु/बुद्ध पूर्णिमा=सर्वश्रेष्ठ।

पूर्णिमाध्यानचन्द्रमा
व्रत विधि

पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा करने का क्या विधान है?

सत्यनारायण: पूर्णिमा=शुभ तिथि, विष्णु सत्य स्वरूप। विधि: षोडशोपचार→कथा (5 अध्याय, अनिवार्य)→आरती→प्रसाद (शीरा+केला)। प्रसाद अस्वीकार न करें। अवसर: नया कार्य, गृह प्रवेश, मनोकामना। सरलतम गृहस्थ पूजा।

सत्यनारायणपूर्णिमाविष्णु
तंत्र साधना

तंत्र में पूर्णिमा और अमावस्या की साधना में क्या भेद है

पूर्णिमा = सौम्य/सात्विक: प्रकाश, शान्ति, ज्ञान, विष्णु/लक्ष्मी/गुरु। अमावस्या = उग्र/तामसिक: अन्धकार, गोपनीय शक्ति, काली/भैरव, पितृ। दीपावली = सबसे शक्तिशाली अमावस्या। पूर्णिमा = सभी, अमावस्या = उन्नत/दीक्षित। दोनों में सात्विक जप-ध्यान शुभ।

पूर्णिमाअमावस्यातंत्र
व्रत

पूर्णिमा व्रत कैसे रखें और पूजा कैसे करें

पूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान → संकल्प → निराहार/फलाहार/एकभुक्त। पूजा: गणपति → सत्यनारायण/विष्णु → रात्रि चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → सत्यनारायण कथा → दान। विशेष: गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा।

पूर्णिमाव्रतचन्द्र
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों करते हैं

सत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों: (1) स्कन्द पुराण में शुक्ल पक्ष/पूर्णिमा विधान। (2) पूर्णिमा = विष्णु की तिथि, पूर्णता-सम्पन्नता प्रतीक। (3) शुक्ल पक्ष चरम = सर्वाधिक शुभ। (4) मासिक नियमितता सुविधाजनक। अन्य दिन भी मान्य: एकादशी, संक्रान्ति, शुभ अवसर।

सत्यनारायणपूर्णिमाविष्णु
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा में कलश स्थापना कैसे करें

कलश स्थापना: चौकी पर अक्षत → ताँबे का कलश → शुद्ध जल + गंगाजल + तुलसी + दूर्वा + सुपारी + सिक्का → 'कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से पूजन → 5 आम पत्ते मुख पर → नारियल (रोली-चन्दन-मौली सहित) ऊपर → कलश के गले में मौली। कलश = ब्रह्माण्ड का प्रतीक।

सत्यनारायणकलश स्थापनाविष्णु

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।