विस्तृत उत्तर
सत्यनारायण व्रत के लिए 'पूर्णिमा' (Full Moon) को सर्वश्रेष्ठ तिथि माना गया है। इसके अतिरिक्त मकर/कर्क संक्रांति, एकादशी और गुरुवार को भी यह पूजा प्रशस्त मानी गई है। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, चूंकि यह पूजा मुख्य रूप से सायं काल (गोधूलि बेला) में की जाती है, अतः व्रत उसी दिन करना चाहिए जिस दिन पूर्णिमा तिथि शाम के समय (प्रदोष व्यापिनी) विद्यमान हो। यदि पूजा शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पूर्णिमा के अगले दिन) को की जा रही है, तो संकल्प में 'प्रतिपदा' का ही उच्चारण होना चाहिए, भले ही पूर्णिमा का प्रभाव शेष हो।





