विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय गणना के अनुसार, प्रदोष काल का सबसे शुद्ध और प्रामाणिक समय स्थानीय सूर्यास्त से 45 मिनट (लगभग 2 घटी) पहले शुरू होकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक रहता है। कुल मिलाकर यह 90 मिनट (1.5 घंटे) की अवधि होती है। साधक को अपने स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार इसी 90 मिनट के 'कोर' समय को प्रदोष काल मानकर साधना आरंभ करनी चाहिए।





