विस्तृत उत्तर
शिवलिंग पूजा के शुभ समयों का वर्णन शिव पुराण और धर्म सिंधु में विस्तार से मिलता है:
दैनिक श्रेष्ठ काल
1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36 बजे) — सर्वोत्तम
शांत वातावरण, शुद्ध ऊर्जा। पूजा का फल सहस्र गुना।
2सूर्योदय काल (प्रातः 6-7:30 बजे)
गृहस्थों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त। स्नान के बाद पूजा।
3प्रदोष काल (शाम 4:30-7:30 बजे के आसपास) — शिव विशेष
शिव पुराण में प्रदोष काल को शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम बताया गया है। इस काल में शिव गणों और देवताओं के साथ प्रसन्न होकर भ्रमण करते हैं।
वार के अनुसार
| वार | महत्व |
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| सोमवार | शिव का प्रिय दिन; सोमवार व्रत |
| शनिवार | नीलकंठ; शनि दोष निवारण |
| मंगलवार | कुछ परंपराओं में शिव पूजा |
तिथि के अनुसार
| तिथि | महत्व |
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| प्रदोष (त्रयोदशी) | प्रदोष व्रत — शिव पूजा का महाकाल |
| चतुर्दशी | शिवरात्रि (प्रति माह) |
| महाशिवरात्रि | फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — वार्षिक महापूजा |
| अमावस्या | महेश्वर पूजन |
मास के अनुसार
| मास | महत्व |
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| श्रावण | शिव का सर्वप्रिय मास — पूरे मास विशेष |
| फाल्गुन | महाशिवरात्रि |
| मार्गशीर्ष | शिव ध्यान |
पूजा के लिए वर्जित समय
- ▸राहुकाल में नई पूजा न आरंभ करें
- ▸सूतक-पातक (मृत्यु/जन्म के 10-13 दिन) में मंदिर न जाएं
- ▸मासिक धर्म के समय महिलाएं शिवलिंग न छुएं (परंपरागत नियम)
शिव पुराण का सर्वोत्तम वचन
शिवं शिवकर्म वा ध्यायेत् सर्वदा' — शिव का स्मरण सर्वदा करें — कोई समय बंधन नहीं। किंतु नित्य एक निश्चित समय पर पूजा से विशेष फल मिलता है।





