विस्तृत उत्तर
पूजा के शुभ समय का वर्णन मनुस्मृति, धर्म सिंधु और ज्योतिष शास्त्र में विस्तार से मिलता है:
त्रिसंध्या — तीन श्रेष्ठ पूजा काल
1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00 – 5:36 बजे) — सर्वोत्तम
सूर्योदय से डेढ़ घंटे पूर्व। मनुस्मृति: 'ब्राह्मे मुहूर्ते चोत्थाय।'
- ▸वातावरण सात्विक और शांत
- ▸मन सर्वाधिक एकाग्र
- ▸पूजा का फल सहस्र गुना (शास्त्रोक्त)
- ▸आध्यात्मिक ऊर्जा चरम पर
2प्रातः संध्या (सूर्योदय — प्रातः 6:00 – 7:30 बजे)
स्नान के बाद प्रातः पूजा। गृहस्थों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त।
- ▸अधिकांश लोगों की नित्य पूजा का समय
- ▸सूर्योदय के समय पूर्व मुख पूजा विशेष शुभ
3सायंकाल संध्या (सूर्यास्त — शाम 5:30 – 7:00 बजे)
दिन की समाप्ति पर। संध्या दीप और आरती का विशेष महत्व।
- ▸'संध्यादीप' — सायंकाल दीप जलाना मंगलकारी
- ▸इस समय देवता पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं (स्कंद पुराण)
वार के अनुसार विशेष पूजा
| वार | देवता | विशेष |
|-----|--------|--------|
| सोमवार | शिव | सोमवार व्रत; 'ॐ नमः शिवाय' |
| मंगलवार | हनुमान/मंगल | हनुमान चालीसा, सुंदरकांड |
| बुधवार | गणेश/विष्णु | 'ॐ गं गणपतये नमः' |
| गुरुवार | विष्णु/बृहस्पति | विष्णु सहस्रनाम |
| शुक्रवार | लक्ष्मी/देवी | श्री सूक्त पाठ |
| शनिवार | हनुमान/शनि | हनुमान चालीसा, तेल दीप |
| रविवार | सूर्य | गायत्री मंत्र, सूर्य अर्घ्य |
तिथि के अनुसार पूजा
- ▸एकादशी — विष्णु पूजन; व्रत विशेष
- ▸प्रदोष (त्रयोदशी) — शिव पूजन
- ▸पूर्णिमा — सत्यनारायण व्रत, लक्ष्मी पूजन
- ▸अमावस्या — पितृ पूजन
- ▸चतुर्थी — गणेश पूजन
- ▸अष्टमी — देवी पूजन
पूजा के लिए वर्जित समय
- ▸राहुकाल — प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट; नया कार्य और पूजा उचित नहीं
- ▸सूतक-पातक काल — मृत्यु या जन्म के 10-13 दिन
- ▸ग्रहण काल — सामान्य जन पूजा न करें (केवल स्मरण करें)
विष्णु पुराण का वचन
प्रातःकाले तु यः पूजां करोति भक्तिमान् नरः। स लभेत् सर्वसौभाग्यं ज्ञानं च परमं सुखम्।' — जो प्रातःकाल भक्ति से पूजा करता है उसे सौभाग्य, ज्ञान और परम सुख मिलता है।





