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पूजा समय⏱ 3 मिनट पठन

पूजा का सही समय क्या है?

पूजा का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36 बजे) है। प्रातः संध्या (सूर्योदय) गृहस्थों के लिए उत्तम है।

संक्षिप्त उत्तर

पूजा का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36 बजे) है। प्रातः संध्या (सूर्योदय) गृहस्थों के लिए उत्तम है। सायंकाल संध्या दीप और आरती के लिए शुभ है। वार के अनुसार: सोमवार-शिव, मंगलवार-हनुमान, गुरुवार-विष्णु, शुक्रवार-लक्ष्मी। राहुकाल में पूजा उचित नहीं।

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विस्तृत उत्तर

पूजा के शुभ समय का वर्णन मनुस्मृति, धर्म सिंधु और ज्योतिष शास्त्र में विस्तार से मिलता है:

त्रिसंध्या — तीन श्रेष्ठ पूजा काल

1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00 – 5:36 बजे) — सर्वोत्तम

सूर्योदय से डेढ़ घंटे पूर्व। मनुस्मृति: 'ब्राह्मे मुहूर्ते चोत्थाय।'

  • ▸वातावरण सात्विक और शांत
  • ▸मन सर्वाधिक एकाग्र
  • ▸पूजा का फल सहस्र गुना (शास्त्रोक्त)
  • ▸आध्यात्मिक ऊर्जा चरम पर

2प्रातः संध्या (सूर्योदय — प्रातः 6:00 – 7:30 बजे)

स्नान के बाद प्रातः पूजा। गृहस्थों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त।

  • ▸अधिकांश लोगों की नित्य पूजा का समय
  • ▸सूर्योदय के समय पूर्व मुख पूजा विशेष शुभ

3सायंकाल संध्या (सूर्यास्त — शाम 5:30 – 7:00 बजे)

दिन की समाप्ति पर। संध्या दीप और आरती का विशेष महत्व।

  • ▸'संध्यादीप' — सायंकाल दीप जलाना मंगलकारी
  • ▸इस समय देवता पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं (स्कंद पुराण)

वार के अनुसार विशेष पूजा

| वार | देवता | विशेष |

|-----|--------|--------|

| सोमवार | शिव | सोमवार व्रत; 'ॐ नमः शिवाय' |

| मंगलवार | हनुमान/मंगल | हनुमान चालीसा, सुंदरकांड |

| बुधवार | गणेश/विष्णु | 'ॐ गं गणपतये नमः' |

| गुरुवार | विष्णु/बृहस्पति | विष्णु सहस्रनाम |

| शुक्रवार | लक्ष्मी/देवी | श्री सूक्त पाठ |

| शनिवार | हनुमान/शनि | हनुमान चालीसा, तेल दीप |

| रविवार | सूर्य | गायत्री मंत्र, सूर्य अर्घ्य |

तिथि के अनुसार पूजा

  • ▸एकादशी — विष्णु पूजन; व्रत विशेष
  • ▸प्रदोष (त्रयोदशी) — शिव पूजन
  • ▸पूर्णिमा — सत्यनारायण व्रत, लक्ष्मी पूजन
  • ▸अमावस्या — पितृ पूजन
  • ▸चतुर्थी — गणेश पूजन
  • ▸अष्टमी — देवी पूजन

पूजा के लिए वर्जित समय

  • ▸राहुकाल — प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट; नया कार्य और पूजा उचित नहीं
  • ▸सूतक-पातक काल — मृत्यु या जन्म के 10-13 दिन
  • ▸ग्रहण काल — सामान्य जन पूजा न करें (केवल स्मरण करें)

विष्णु पुराण का वचन

प्रातःकाले तु यः पूजां करोति भक्तिमान् नरः। स लभेत् सर्वसौभाग्यं ज्ञानं च परमं सुखम्।' — जो प्रातःकाल भक्ति से पूजा करता है उसे सौभाग्य, ज्ञान और परम सुख मिलता है।
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