मंगलवार, 31 मार्च 2026
राहु काल (Rahu Kaal) हिंदू ज्योतिष में प्रतिदिन का एक विशेष अशुभ काल है जो राहु ग्रह के प्रभाव में होता है। सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच का समय 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। इनमें से एक भाग राहु काल होता है -- लगभग 90 मिनट।
वार अनुसार राहु काल का क्रम: रविवार को 8वाँ भाग, सोमवार को 2वाँ, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6वाँ, शुक्रवार को 4वाँ और शनिवार को 3वाँ भाग राहु काल होता है।
इसे स्मरण रखने के लिए "रा -- म -- बु -- शु -- गु -- श -- र" क्रम याद किया जाता है। यह क्रम बताता है कि किस वार को कौन-सा भाग राहु काल है।
राहु काल में नए कार्य की शुरुआत, विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार प्रारंभ और यात्रा से बचना चाहिए। यह समय राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव में होता है।
राहु काल लगभग 90 मिनट (डेढ़ घंटे) का होता है। यह सूर्योदय से सूर्यास्त के समय को 8 बराबर भागों में बाँटने पर एक भाग के बराबर होता है।
हाँ, राहु काल में राहु की पूजा और दुर्गा माता की आराधना शुभ मानी जाती है। नित्य पूजा-पाठ और मंत्र जाप जारी रखा जा सकता है।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल समय को 8 भागों में बाँटकर वार के अनुसार निर्धारित भाग राहु काल माना जाता है। हर शहर में सूर्योदय-सूर्यास्त के समय अलग होने से राहु काल भी अलग होता है।