ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
पूजा समय📜 धर्म सिंधु — त्रिकाल संध्या, मनुस्मृति, आपस्तम्ब गृह्यसूत्र2 मिनट पठन

पूजा का सही समय क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा का सर्वोत्तम समय: ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00–5:36)। त्रिकाल संध्या — सूर्योदय, दोपहर और सूर्यास्त — भी शुभ। शिव पूजा के लिए प्रदोष काल विशेष। नित्य एक ही समय पर पूजा करना — नियमितता सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

📖

विस्तृत उत्तर

पूजा के शुभ समय का वर्णन धर्म सिंधु और मनुस्मृति में मिलता है:

त्रिकाल संध्या — तीन पवित्र काल

| काल | समय | महत्व |

|-----|-----|-------|

| ब्रह्ममुहूर्त | प्रातः 4:00–5:36 | सर्वोत्तम — सात्विक वातावरण |

| संध्याकाल | सूर्योदय के समय | प्रातः संध्या |

| सायंसंध्या | सूर्यास्त के समय | सायं पूजा |

ब्रह्ममुहूर्त क्यों श्रेष्ठ

  • मन सर्वाधिक एकाग्र
  • वातावरण शांत और सात्विक
  • दिन की शुरुआत पवित्र भाव से
  • मनुस्मृति: 'ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत्' — ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पूजा करें

अन्य शुभ समय

  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद 1.5 घंटे) — शिव पूजा के लिए विशेष
  • निशीथ काल (आधी रात) — देवी साधना के लिए

वर्जित समय

  • राहुकाल — नई पूजा आरंभ न करें (धर्म सिंधु)
  • भोजन के तुरंत बाद
  • क्रोध या अशांत मन से

नित्य पूजा

धर्म सिंधु का मत है — नित्य एक ही समय पर पूजा करना श्रेष्ठ है। नियमितता समय की श्रेष्ठता से अधिक महत्वपूर्ण है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु — त्रिकाल संध्या, मनुस्मृति, आपस्तम्ब गृह्यसूत्र
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

पूजा समयब्रह्ममुहूर्तसंध्यात्रिकाल

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

पूजा का सही समय क्या है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको पूजा समय से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर धर्म सिंधु — त्रिकाल संध्या, मनुस्मृति, आपस्तम्ब गृह्यसूत्र पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।