विस्तृत उत्तर
काली पूजा के शुभ समयों का वर्णन कालिका पुराण और महानिर्वाण तंत्र में मिलता है:
वार्षिक महाकाल — सर्वोत्तम
1दीपावली की रात (कार्तिक अमावस्या) — महाकाल
काली पूजा का सर्वोच्च पर्व। बंगाल में दुर्गा पूजा के बाद सबसे बड़ा पर्व। काली की विशेष प्रकटी इसी रात हुई थी — तंत्र शास्त्र का मत।
2शारद नवरात्रि — सप्तमी और अष्टमी
नवरात्रि के सातवें और आठवें दिन काली की विशेष पूजा।
3काली पूजा (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी)
दीपावली से एक दिन पूर्व — यह काली का विशेष पर्व है।
मासिक शुभ समय
| तिथि | महत्व |
|------|-------|
| अमावस्या | काली पूजा का सर्वश्रेष्ठ मासिक काल |
| कृष्ण अष्टमी | कालाष्टमी — काली की विशेष तिथि |
| कृष्ण चतुर्दशी | मासिक शिवरात्रि — काली पूजा |
दैनिक शुभ समय
| काल | समय | महत्व |
|-----|-----|-------|
| निशीथ काल | रात्रि 12:00 बजे | तांत्रिक साधना का महाकाल |
| ब्रह्ममुहूर्त | प्रातः 4-5:36 | भक्ति पूजा के लिए |
| प्रदोष काल | सूर्यास्त के बाद | सायंकाल पूजा |
वार
- ▸शनिवार — काली का प्रिय वार; तांत्रिक मत
- ▸मंगलवार — उग्र देवी पूजा के लिए
सामान्य साधकों के लिए
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त और सायंकाल दोनों समय उचित। निशीथ काल की साधना केवल अनुभवी दीक्षित साधकों के लिए है।





