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पूजा समय📜 कालिका पुराण, महानिर्वाण तंत्र, शाक्त आगम परंपरा2 मिनट पठन

काली पूजा कब करनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

काली पूजा का सर्वोत्तम समय: दीपावली की रात (कार्तिक अमावस्या) — महाकाल। मासिक: अमावस्या और कालाष्टमी (कृष्ण अष्टमी)। वार: शनिवार और मंगलवार। दैनिक: ब्रह्ममुहूर्त (सामान्य साधना) और निशीथ काल (तांत्रिक साधना — केवल दीक्षित)।

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विस्तृत उत्तर

काली पूजा के शुभ समयों का वर्णन कालिका पुराण और महानिर्वाण तंत्र में मिलता है:

वार्षिक महाकाल — सर्वोत्तम

1दीपावली की रात (कार्तिक अमावस्या) — महाकाल

काली पूजा का सर्वोच्च पर्व। बंगाल में दुर्गा पूजा के बाद सबसे बड़ा पर्व। काली की विशेष प्रकटी इसी रात हुई थी — तंत्र शास्त्र का मत।

2शारद नवरात्रि — सप्तमी और अष्टमी

नवरात्रि के सातवें और आठवें दिन काली की विशेष पूजा।

3काली पूजा (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी)

दीपावली से एक दिन पूर्व — यह काली का विशेष पर्व है।

मासिक शुभ समय

| तिथि | महत्व |

|------|-------|

| अमावस्या | काली पूजा का सर्वश्रेष्ठ मासिक काल |

| कृष्ण अष्टमी | कालाष्टमी — काली की विशेष तिथि |

| कृष्ण चतुर्दशी | मासिक शिवरात्रि — काली पूजा |

दैनिक शुभ समय

| काल | समय | महत्व |

|-----|-----|-------|

| निशीथ काल | रात्रि 12:00 बजे | तांत्रिक साधना का महाकाल |

| ब्रह्ममुहूर्त | प्रातः 4-5:36 | भक्ति पूजा के लिए |

| प्रदोष काल | सूर्यास्त के बाद | सायंकाल पूजा |

वार

  • शनिवार — काली का प्रिय वार; तांत्रिक मत
  • मंगलवार — उग्र देवी पूजा के लिए

सामान्य साधकों के लिए

प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त और सायंकाल दोनों समय उचित। निशीथ काल की साधना केवल अनुभवी दीक्षित साधकों के लिए है।

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शास्त्रीय स्रोत
कालिका पुराण, महानिर्वाण तंत्र, शाक्त आगम परंपरा
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