विस्तृत उत्तर
वितल लोक में दिन और रात इसलिए नहीं होते क्योंकि वहाँ सूर्योदय या सूर्यास्त नहीं होता। सूर्य के प्रकाश से ही दिन और रात की गणना होती है और उसी से काल, अर्थात समय, का प्रभाव और भय उत्पन्न होता है। चूँकि वितल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश सीधे नहीं पहुँचता, इसलिए यहाँ दिन और रात का कोई भेद या विभाजन नहीं होता। महान नागों की मणियों के प्रकाश से यह लोक निरंतर जगमगाता रहता है। दिन-रात का विभाजन न होने के कारण वहाँ के निवासियों को समय के बीतने का कोई भान नहीं होता।
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