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विस्तृत उत्तर
धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु के अनुसार व्रत के लिए 'प्रदोष व्यापिनी' (Pradosh Vyapini) तिथि को वरीयता दी जाती है, जिसका श्लोक है—"त्रयोदशी प्रदोषव्यापिनी ग्राह्या"। इसका पहला नियम 'पूर्ण व्याप्ति' है: यदि त्रयोदशी तिथि सूर्योदय से शुरू होकर पूरे दिन रहती है और सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल (2 घंटे 24 मिनट) में भी विद्यमान रहती है, तो निर्विवाद रूप से उसी दिन व्रत किया जाएगा।
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