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विस्तृत उत्तर
तिथि क्षय और स्पर्श' नियम के अनुसार, यदि त्रयोदशी तिथि दिन के मध्य में समाप्त हो रही हो और प्रदोष काल शुरू होने से पहले ही चतुर्दशी लग जाए, तो वह दिन व्रत के लिए अमान्य है। व्रत उस दिन रखा जाएगा जब त्रयोदशी प्रदोष काल को स्पर्श कर रही हो (अर्थात एक दिन पहले)। वहीं 'साम्यावस्था' नियम के अनुसार, यदि त्रयोदशी तिथि दो दिनों तक प्रदोष काल को स्पर्श करती है (पहले दिन अंत में और दूसरे दिन प्रारंभ में), तो धर्म सिंधु के अनुसार दूसरे दिन (परेद्युः) व्रत करना श्रेष्ठ माना जाता है, विशेषकर यदि वह तिथि सूर्योदय को भी स्पर्श कर रही हो।
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