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विस्तृत उत्तर
सामान्यतः सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष कहा जाता है, लेकिन शास्त्रीय गणना में इसकी विशिष्ट अवधि है—सूर्यास्त से लेकर रात्रि के प्रथम प्रहर के अंत तक का समय। घटिका गणना के अनुसार: सूर्यास्त के बाद की 2 घंटे 24 मिनट (6 घटिका) की अवधि को प्रदोष काल माना जाता है। एक घटिका 24 मिनट की होती है, अतः 6 x 24 = 144 मिनट। इसे 'त्रिमूहूर्त' भी कहते हैं, क्योंकि कुछ आचार्यों के अनुसार सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त (1 मुहूर्त = 48 मिनट, अतः 3 x 48 = 144 मिनट) प्रदोष काल है। जब त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के बाद कम से कम इस अवधि में विद्यमान हो, तभी व्रत किया जाता है।
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