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विस्तृत उत्तर
सृष्टि से पहले प्रकृति पूर्ण साम्यावस्था में थी। इसका अर्थ है कि सत्त्व, रजस और तमस तीनों गुण संतुलन में शांत थे और किसी भी प्रकार की सक्रियता नहीं थी। न कोई रूप था, न नाम, न गति और न भेद। जब विष्णु का सृजन-संकल्प जागा, तभी इस शांत प्रकृति में स्पंदन आया और सृष्टि की प्रक्रिया शुरू हुई।
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