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विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्रों के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत उस दिन रखा जाता है जब चतुर्दशी तिथि 'निशीथ काल' (आधी रात के समय) में मौजूद हो। यदि चतुर्दशी तिथि अर्धरात्रि को स्पर्श करती है, तो वही व्रत के लिए ग्राह्य है। शिवरात्रि में दिन के समय की अपेक्षा मध्यरात्रि की पूजा का महत्व सबसे अधिक होता है।
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