विस्तृत उत्तर
शनिवार व्रत का प्रारंभ शुक्ल पक्ष (Waxing Moon) के किसी भी शनिवार से करना शास्त्र-सम्मत है। श्रावण, वैशाख, मार्गशीर्ष या कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष का प्रथम शनिवार अति उत्तम माना जाता है। यदि उस दिन 'श्रवण' नक्षत्र, 'रोहिणी' नक्षत्र, या 'त्रयोदशी' (शनि प्रदोष) हो तो अनंत गुना फल मिलता है। शास्त्रों में व्रत की संख्या विषम (Odd numbers) बताई गई है: लघु अनुष्ठान 7 शनिवार, मध्यम अनुष्ठान 11 या 19 शनिवार ('व्रतराज' में 19 शनिवार का विशेष महत्व है), और दीर्घ अनुष्ठान 21 या 51 शनिवार का होता है। साढ़ेसाती के कष्टों के निवारण हेतु कई साधक 23,000 मंत्र जप पूर्ण होने तक या पूरी साढ़ेसाती के दौरान भी व्रत रखते हैं।
