विस्तृत उत्तर
निर्णय सिंधु के अनुसार, वाहन क्रय और पूजन के लिए शुक्ल पक्ष की तिथियाँ अत्यंत प्रभावी मानी जाती हैं। प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियों में ऊर्जा का सकारात्मक संचार होता है।
शुभ तिथियाँ: १, ३, ५, ६, ८, १०, ११, १३, १५ — ये तिथियाँ कार्य में स्थिरता और वृद्धि प्रदान करती हैं।
त्याज्य तिथियाँ: अमावस्या, ४ (चतुर्थी), ९ (नवमी), १४ (चतुर्दशी) — ये 'रिक्ता' तिथियाँ और अमावस्या मानसिक अस्थिरता और अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं।


