विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, वसंत पंचमी के लिए माघ शुक्ल पक्ष की वह पंचमी तिथि ग्राह्य होती है जो 'मध्याह्न' (दोपहर के समय) को स्पर्श कर रही हो। मध्याह्न काल वह समय है जब सूर्य अपने सर्वोच्च तेज पर होता है, जो ज्ञान के पूर्ण प्रकाश का प्रतीक है।
यदि पंचमी तिथि दो लगातार दिनों में मध्याह्न को स्पर्श करती है, तो 'पूर्वविद्धा' (चतुर्थी तिथि से युक्त पंचमी) को ही व्रत और पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
वसंत पंचमी पर पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय सूर्योदय के पश्चात पूर्वाह्न से लेकर मध्याह्न क्षण तक का होता है।
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