विस्तृत उत्तर
नवरात्रि में घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का चयन अत्यंत सतर्कता, सूक्ष्म ज्योतिषीय गणनाओं और शास्त्रीय नियमों के अधीन किया जाना अनिवार्य है। 'निर्णयसिन्धु' और 'धर्मसिन्धु' जैसे प्रामाणिक धर्मशास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, देवी के आवाह्न और घटस्थापना के समय काल-दोषों का पूर्णतः परिहार होना चाहिए।
शास्त्रों में मुहूर्त निर्धारण के नियम:
— कलश स्थापना के समय प्रतिपदा तिथि की व्याप्ति होना सर्वथा अनिवार्य है।
— सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त प्रतिपदा के प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल) में ही माना जाता है।
— यदि प्रातःकाल का समय उपलब्ध न हो, तो 'अभिजित मुहूर्त' (मध्याह्न काल) में घटस्थापना की जा सकती है।
— घटस्थापना के लिए 'द्विस्वभाव लग्न' (जैसे मीन, मिथुन, कन्या, धनु) को तंत्र और ज्योतिष शास्त्रों में अत्यंत फलदायी माना गया है।



