विस्तृत उत्तर
धर्मसिंधु के अनुसार, राहुकाल में किया गया कोई भी शुभ कार्य भविष्य में 'अरिष्ट' (अनिष्ट) का कारण बन सकता है। अतः मुहूर्त निकालते समय राहुकाल का त्याग अनिवार्य है।
राहु को छाया ग्रह माना गया है जो नकारात्मक ऊर्जा और अनिश्चितता का प्रतीक है। राहुकाल में किए गए शुभ कार्यों के परिणाम प्रायः विपरीत या देरी से प्राप्त होते हैं। वाहन जैसी महत्वपूर्ण वस्तु की पूजा के लिए यह समय सर्वथा अनुचित माना गया है।





