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धर्मसिंधु से जुड़े सभी प्रश्न(8)

धर्मसिंधु पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 8 प्रश्न उपलब्ध हैं।

नियम और निषेध

मकर संक्रांति पर क्या नहीं खाना चाहिए?

धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु: मकर संक्रांति पर पूर्णतः वर्जित — लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडे, सिगरेट और तम्बाकू। यह तपस्या का दिन है और तामसिक आहार सबसे बड़ी बाधा।

#मकर संक्रांति आहार निषेध#तामसिक भोजन#लहसुन प्याज मांस
स्नान विधि

धर्मसिंधु के अनुसार स्नान न करने से क्या होता है?

धर्मसिंधु: मकर संक्रांति पर स्नान न करने से आगामी सात जन्मों तक दरिद्र और रोगी रहना पड़ता है।

#स्नान न करने का दोष#धर्मसिंधु#7 जन्म दरिद्र
स्नान विधि

मकर संक्रांति पर स्नान का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति पर स्नान = नित्य कर्म। धर्मसिंधु: स्नान न करने से 7 जन्म तक दरिद्र और रोगी। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान = 10,000 गोदान का पुण्य।

#मकर संक्रांति स्नान#नित्य कर्म#धर्मसिंधु
शुभ मुहूर्त

वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त: माघ शुक्ल पंचमी जो मध्याह्न को स्पर्श करे। पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय = सूर्योदय के बाद पूर्वाह्न से मध्याह्न क्षण तक। यदि दो दिन हो तो 'पूर्वविद्धा' (चतुर्थी युक्त पंचमी) ग्राह्य।

#सरस्वती पूजा मुहूर्त#मध्याह्न#धर्मसिंधु
शुभ मुहूर्त

राहुकाल में गाड़ी की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?

धर्मसिंधु: राहुकाल में किया गया कोई भी शुभ कार्य भविष्य में 'अरिष्ट' (अनिष्ट) का कारण बन सकता है। राहु = नकारात्मक ऊर्जा और अनिश्चितता का प्रतीक। वाहन पूजन के लिए यह समय सर्वथा अनुचित।

#राहुकाल#अरिष्ट#धर्मसिंधु
तिथि निर्णय

कालाष्टमी व्रत की पूजा का सही समय (तिथि) क्या है?

कालभैरव रात्रिकालीन देवता हैं, इसलिए यह व्रत उस दिन किया जाता है जब अष्टमी तिथि सूर्यास्त के बाद और मध्यरात्रि (निशीथ काल) में मौजूद हो।

#तिथि निर्णय#रात्रिव्यापिनी#धर्मसिंधु
तिथि निर्णय

मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत किस दिन रखा जाता है?

यह व्रत उस दिन रखा जाता है जब सूर्योदय के समय शुद्ध अष्टमी तिथि हो। यदि अष्टमी तिथि दोपहर या शाम को भी स्पर्श करती है, तो वह दिन सबसे शुभ माना जाता है।

#तिथि निर्णय#उदयातिथि#धर्मसिंधु
नियम और वर्जनाएं

क्या महिलाएं मासिक धर्म (Periods) में शनिवार का व्रत कर सकती हैं?

हाँ, वे व्रत (उपवास) रख सकती हैं और मन में मंत्र पढ़ सकती हैं। लेकिन पूजा करना, मूर्ति छूना या मंदिर जाना सख्त मना है। इन दिनों के व्रत को कुल व्रत की गिनती में नहीं जोड़ा जाता।

#मासिक धर्म#रजस्वला नियम#धर्मसिंधु
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