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विस्तृत उत्तर
मकर संक्रांति का सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य कृत्य 'स्नान' है। इसे नित्य कर्म की श्रेणी में रखा गया है।
धर्मसिंधु' के अनुसार, जो व्यक्ति संक्रांति के दिन स्नान नहीं करता, वह आगामी सात जन्मों तक दरिद्र और रोगी रहता है।
स्नान का यह कृत्य ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग अड़तालीस मिनट पूर्व) में संपन्न करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है। सूर्योदय से पूर्व स्नान करने से दस हजार गोदान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है।
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