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पांच महायज्ञ प्रतिदिन करने का विधान?

संक्षिप्त उत्तर

5 महायज्ञ: 1.ब्रह्म(स्वाध्याय) 2.देव(हवन/पूजा) 3.पितृ(तर्पण) 4.भूत(प्राणी भोजन) 5.अतिथि(सेवा)। = 5 ऋण। आधुनिक: गीता+दीपक+पितर स्मरण+गाय रोटी+मेहमान=15 मिनट।

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विस्तृत उत्तर

पंचमहायज्ञ = गृहस्थ के 5 दैनिक कर्तव्य (मनुस्मृति 3.67-74):

  1. 1ब्रह्मयज्ञ (ऋषि यज्ञ): वेद/शास्त्र पठन+स्वाध्याय। = ऋषियों का ऋण चुकाना।
  2. 2देवयज्ञ: हवन/अग्निहोत्र/पूजा। = देवताओं का ऋण।
  3. 3पितृयज्ञ: तर्पण/श्राद्ध/पितर स्मरण। = पितरों का ऋण।
  4. 4भूतयज्ञ (बलिवैश्वदेव): प्राणियों को भोजन — गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी। = प्राणियों का ऋण।
  5. 5अतिथियज्ञ (नृयज्ञ): अतिथि सेवा/भोजन। = मनुष्यों का ऋण।

सरल आधुनिक रूप

  1. 1ब्रह्मयज्ञ = गीता/किताब पढ़ें (5 मिनट)।
  2. 2देवयज्ञ = दीपक+अगरबत्ती+प्रार्थना (5 मिनट)।
  3. 3पितृयज्ञ = पितरों को स्मरण+'ॐ पितृभ्यो नमः' (1 मिनट)।
  4. 4भूतयज्ञ = गाय/कुत्ते/पक्षी को रोटी/दाना (2 मिनट)।
  5. 5अतिथियज्ञ = मेहमान/गरीब को भोजन/सहायता।

= कुल 15 मिनट = 5 ऋण चुकता!

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