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सूर्य को जल देते समय किस दिशा में खड़े हों

संक्षिप्त उत्तर

सूर्य को जल देते समय मुख सदैव पूर्व दिशा (सूर्योदय की दिशा) की ओर रखें। खुले स्थान पर नंगे पैर खड़े होकर, दोनों हाथों से तांबे का लोटा उठाकर धारा से जल अर्पित करें। जल की धारा से सूर्य किरणें देखना शुभ है। पूर्व दिशा देवताओं की दिशा मानी गई है।

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विस्तृत उत्तर

सूर्य को जल अर्पित करते समय दिशा का विशेष महत्व है।

मुख्य नियम

सूर्य को जल देते समय आपका मुख सदैव पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है और शास्त्रों में इसे अत्यन्त शुभ माना गया है। सूर्य देव पूर्व दिशा से उदय होते हैं, अतः उनकी ओर मुख करके अर्घ्य देना उचित विधि है।

कैसे खड़े हों

  • खुले स्थान पर (छत, आंगन, बगीचा) पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
  • दोनों हाथों से तांबे का लोटा पकड़ें।
  • लोटे को कंधे की ऊंचाई तक उठाकर धीरे-धीरे जल की धारा गिराएँ।
  • जल की धारा के बीच से सूर्य किरणों को देखना शुभ माना जाता है — इससे नेत्रों को लाभ होता है।

ध्यान रखें

  • जूते-चप्पल उतारकर नंगे पैर खड़े हों।
  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर अर्घ्य दें।
  • जल सदैव आगे की ओर (सूर्य की दिशा में) गिरे, पैरों पर न गिरे।

अन्य दिशा क्यों नहीं

ज्योतिष के अनुसार पूर्व दिशा देवताओं की दिशा है और सूर्य का उदय इसी से होता है। अन्य दिशा में मुख करके अर्घ्य देने से पूर्ण फल नहीं मिलता।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र
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