विस्तृत उत्तर
धर्मसिंधु' के अनुसार, जो व्यक्ति संक्रांति के दिन स्नान नहीं करता, वह आगामी सात जन्मों तक दरिद्र और रोगी रहता है।
धर्मसिंधु के अनुसार स्नान न करने से क्या होता है को संदर्भ सहित समझें
धर्मसिंधु के अनुसार स्नान न करने से क्या होता है का सबसे सीधा सार यह है: धर्मसिंधु: मकर संक्रांति पर स्नान न करने से आगामी सात जन्मों तक दरिद्र और रोगी रहना पड़ता है।
स्नान विधि जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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मकर संक्रांति पर स्नान का क्या महत्व है?
मकर संक्रांति पर स्नान = नित्य कर्म। धर्मसिंधु: स्नान न करने से 7 जन्म तक दरिद्र और रोगी। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान = 10,000 गोदान का पुण्य।
मकर संक्रांति पर स्नान के समय कौन सा मंत्र पढ़ें?
स्नान मंत्र: 'मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युत! माधव! स्नानेनानेन मे देव! यथोक्तफलदो भव॥' अर्थ: हे गोविंद-अच्युत-माधव! माघ में मकर सूर्य के समय इस स्नान से मुझे शास्त्रोक्त फल दें। यह साधक की शरणागति का प्रतीक।
घर पर स्नान करते समय तीर्थ आवाहन कैसे करें?
घर पर स्नान: जल में गंगाजल मिलाएं और यह मंत्र बोलें: 'गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥' — सात पवित्र नदियों का आवाहन।
मकर संक्रांति पर तीर्थ स्नान का क्या महत्व है?
मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना या प्रयागराज जैसे पवित्र संगम पर तीर्थ स्नान = 'ब्रह्मलोक' की प्राप्ति।
सूर्योदय से पहले स्नान करने का क्या फल है?
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 48 मिनट पहले) में मकर संक्रांति स्नान = 10,000 गोदान के समान पुण्य।
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