विस्तृत उत्तर
धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत उस दिन रखा जाता है जब सूर्योदय के समय शुद्ध अष्टमी तिथि हो। सामान्य गृहस्थों और सात्विक व्रतों में 'उदयातिथि' (सूर्योदय के समय की तिथि) को प्रधानता दी जाती है, क्योंकि यह व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होकर सूर्यास्त या चंद्रोदय तक चलता है। साथ ही, दुर्गा पूजा में 'मध्याह्न काल' (दोपहर) या 'प्रदोष काल' (सूर्यास्त के बाद) की व्याप्ति भी महत्वपूर्ण है। यदि अष्टमी तिथि मध्याह्न को स्पर्श करती है, तो वह 'विजय' का प्रतीक होने के कारण विशेष ग्राह्य मानी जाती है।


