विस्तृत उत्तर
धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, एकादशी का निर्णय दो तरह से होता है। 'स्मार्त' (गृहस्थ) परंपरा में 'सूर्योदय वेध' को प्रधानता दी जाती है, यानी एकादशी तिथि सूर्योदय के समय होनी चाहिए। वहीं, 'वैष्णव' (संन्यासी) परंपरा में 'अरुणोदय वेध' (सूर्योदय से 1 घंटा 36 मिनट पहले) देखा जाता है। यदि अरुणोदय में दशमी का थोड़ा सा भी अंश (विद्धा) हो, तो वैष्णव उसे छोड़ देते हैं और 'शुद्ध एकादशी' (द्वादशी युक्त) का ही उपवास करते हैं।
