विस्तृत उत्तर
साधकों के उद्देश्य के आधार पर इसका निर्णय होता है। सामान्यतः गृहस्थों के लिए और सात्विक व्रतों में 'उदयातिथि' को प्रधानता दी जाती है। परन्तु तांत्रिक नियमों के अनुसार, यदि साधक किसी विशेष कामना या तांत्रिक सिद्धि के लिए अनुष्ठान कर रहा है, तो 'रात्रिकालीन पूजा' का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में, यदि अष्टमी तिथि सूर्योदय पर न हो लेकिन प्रदोष काल और मध्यरात्रि (निशीथ काल) में व्याप्त हो, तो उस दिन को तांत्रिक पूजा के लिए चुना जा सकता है। हालाँकि, मासिक व्रतों की सामान्य परिपाटी में उदयातिथि को ही प्राथमिकता दी जाती है।





