विस्तृत उत्तर
शास्त्रों और निर्णयसिंधु के अनुसार, एकादशी दो प्रकार की होती है। 'शुद्धा' एकादशी वह है जिसमें अरुणोदय काल (सूर्योदय से 1 घंटा 12 मिनट पहले) में दशमी तिथि का बिल्कुल भी स्पर्श न हो। व्रत के लिए यही सही मानी जाती है। दूसरी 'विद्धा' एकादशी होती है जिसमें दशमी तिथि का स्पर्श होता है। शास्त्रों में दशमी मिली हुई (विद्धा) एकादशी का पूरी तरह त्याग करने और उसकी जगह द्वादशी युक्त एकादशी (महाद्वादशी) का व्रत करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
