विस्तृत उत्तर
धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, यदि दशमी तिथि एकादशी को स्पर्श कर रही हो (विशेषकर सूर्योदय से पहले अरुणोदय काल में), तो वह 'विद्ध एकादशी' कहलाती है। शास्त्रों के अनुसार इसका त्याग करना चाहिए क्योंकि दशमी युक्त व्रत का फल असुरों को प्राप्त होता है। 'शुद्ध एकादशी' वह है जो अरुणोदय काल से पूर्व प्रारंभ हो। वैष्णव मत में तिथि क्षय/वृद्धि होने पर हमेशा दूसरे दिन की (द्वादशी युक्त) एकादशी को प्राथमिकता दी जाती है।