विस्तृत उत्तर
महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए 'प्रदोष काल' (सूर्यास्त के बाद का समय) और 'निशीथ काल' (मध्यरात्रि) को सर्वोत्तम माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी शाम के समय पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं, इसलिए इस समय दीप प्रज्वलित कर मंत्र जप करना दरिद्रता का नाश करता है। शुक्रवार के दिन इन मुहूर्तों में जप करने का विशेष फल मिलता है। स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए वृषभ या सिंह जैसे 'स्थिर लग्न' में पूजा करना भी श्रेष्ठ है। इसके अलावा, प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में किया गया जप सात्विक समृद्धि और मानसिक सुख प्रदान करता है।





