विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्रों (निर्णयसिन्धु, धर्मसिन्धु आदि) के अनुसार, अनन्त व्रत का पूजन 'मध्याह्न काल' (दिन के मध्य भाग) में सम्पन्न होना चाहिए। यदि चतुर्दशी तिथि मध्याह्न काल को स्पर्श करती है, तो वही तिथि उपयुक्त मानी जाती है। यदि किसी भी दिन मध्याह्न में पूर्ण रूप से तिथि न हो, तो 'पूर्वविद्धा' (पहले दिन वाली) तिथि को ही ग्रहण किया जाता है।





