विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन स्नान और अनुष्ठान के लिए 'अरुणोदय काल' को परम पुण्यकारी माना गया है। वैदिक कालगणना में सूर्योदय से ठीक पूर्व की 4 घटी (लगभग 1 घंटा 36 मिनट) के समय को अरुणोदय कहा जाता है। भविष्य पुराण और मदनरत्न में स्पष्ट लिखा है कि यदि माघ शुक्ल सप्तमी अरुणोदय वेला में प्राप्त हो, और तीर्थराज प्रयाग में स्नान का अवसर मिले, तो वह करोड़ों सूर्य-ग्रहणों के समय किए गए दान-स्नान के समान फलदायिनी होती है।





