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जप समय📜 धर्म सिंधु — जप काल, मनुस्मृति, तंत्र शास्त्र2 मिनट पठन

मंत्र जप के लिए कौन सा समय सबसे शुभ है?

संक्षिप्त उत्तर

सर्वश्रेष्ठ: ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00-5:36) — सत्व का चरम। पाँच शुभ काल: ब्रह्ममुहूर्त, सूर्योदय, मध्याह्न, सूर्यास्त, निशीथ (तंत्र)। विशेष: पूर्णिमा, एकादशी, प्रदोष। सर्वोच्च: काल से अधिक नित्यता — प्रतिदिन एक ही समय जप करें।

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विस्तृत उत्तर

जप के शुभ समय का वर्णन धर्म सिंधु और मनुस्मृति में विस्तार से मिलता है:

सर्वश्रेष्ठ — ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00 - 5:36)

मनुस्मृति: 'ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत् जपेच्च।' — ब्रह्ममुहूर्त में उठकर जप करें।

इस समय:

  • तमस और रजस न्यूनतम
  • सत्व गुण अधिकतम
  • वातावरण में प्राण शक्ति की अधिकता

पाँच शुभ संध्याकाल

  1. 1ब्रह्ममुहूर्त — सूर्योदय से 1.5 घंटे पहले
  2. 2प्रातः संध्या — सूर्योदय के समय
  3. 3मध्याह्न — दोपहर 12 बजे
  4. 4सायं संध्या — सूर्यास्त के समय
  5. 5निशीथ काल — आधी रात (तंत्र साधना विशेष)

विशेष तिथियाँ

  • पूर्णिमा — सभी जपों के लिए विशेष शुभ
  • अमावस्या — पितृ मंत्र और काली साधना
  • एकादशी — विष्णु मंत्र के लिए विशेष
  • प्रदोष — शिव मंत्र

धर्म सिंधु का सर्वोच्च नियम

काल से अधिक नित्यता महत्वपूर्ण है।' — शुभ समय पर जप श्रेष्ठ है — किंतु नित्य एक ही समय जप उससे भी श्रेष्ठ। अभ्यास से वह समय स्वयं शुभ हो जाता है।
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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु — जप काल, मनुस्मृति, तंत्र शास्त्र
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