विस्तृत उत्तर
जप के शुभ समय का वर्णन धर्म सिंधु और मनुस्मृति में विस्तार से मिलता है:
सर्वश्रेष्ठ — ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00 - 5:36)
मनुस्मृति: 'ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत् जपेच्च।' — ब्रह्ममुहूर्त में उठकर जप करें।
इस समय:
- ▸तमस और रजस न्यूनतम
- ▸सत्व गुण अधिकतम
- ▸वातावरण में प्राण शक्ति की अधिकता
पाँच शुभ संध्याकाल
- 1ब्रह्ममुहूर्त — सूर्योदय से 1.5 घंटे पहले
- 2प्रातः संध्या — सूर्योदय के समय
- 3मध्याह्न — दोपहर 12 बजे
- 4सायं संध्या — सूर्यास्त के समय
- 5निशीथ काल — आधी रात (तंत्र साधना विशेष)
विशेष तिथियाँ
- ▸पूर्णिमा — सभी जपों के लिए विशेष शुभ
- ▸अमावस्या — पितृ मंत्र और काली साधना
- ▸एकादशी — विष्णु मंत्र के लिए विशेष
- ▸प्रदोष — शिव मंत्र
धर्म सिंधु का सर्वोच्च नियम
काल से अधिक नित्यता महत्वपूर्ण है।' — शुभ समय पर जप श्रेष्ठ है — किंतु नित्य एक ही समय जप उससे भी श्रेष्ठ। अभ्यास से वह समय स्वयं शुभ हो जाता है।





