विस्तृत उत्तर
बीज मंत्र जप के उपयुक्त काल का विस्तृत वर्णन शास्त्रों में है:
श्रेष्ठता का क्रम (सर्वोत्तम से सामान्य)
1ब्रह्म मुहूर्त (सर्वोत्तम) — प्रातः 4 से 6 बजे
मनुस्मृति (4.93): 'ब्राह्मे मुहूर्ते बुध्येत धर्मार्थौ चानुचिन्तयेत्।'
ब्रह्म मुहूर्त में — वायु शुद्ध, मन शांत, प्रकृति सात्विक। इस समय मंत्र-ऊर्जा सर्वाधिक ग्रहणशील होती है। तंत्रसार: इस काल में जप का फल 100 गुना अधिक।
2सूर्योदय — प्रातः 6 से 7 बजे
सूर्योदय के समय — सगुण उपासना और सूर्य-संबंधी मंत्रों के लिए विशेष। गायत्री जप इसी समय सर्वश्रेष्ठ।
3मध्याह्न (दोपहर 12 बजे)
संध्या-त्रय में से मध्याह्न-संध्या। सूर्य-मंत्रों के लिए। सामान्य बीज मंत्रों के लिए भी उपयुक्त।
4सायं संध्या — सूर्यास्त के समय
देवी और शक्ति बीज मंत्रों ('क्रीं', 'ह्रीं', 'दुं') के लिए सायं-काल उत्तम। कुलार्णव: सायं-संध्या तांत्रिक साधना के लिए विशेष।
5अर्धरात्रि — रात्रि 12 बजे
काली, भैरव, और उग्र देवताओं के बीज मंत्र के लिए। केवल अनुभवी साधकों के लिए — सामान्य जनों के लिए नहीं।
विशेष काल — अतिरिक्त फल
- ▸एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या: जप-संख्या का फल कई गुना बढ़ता है।
- ▸ग्रहण काल: अत्यंत शक्तिशाली — परंतु ग्रहण-स्नान के बाद ही।
- ▸नवरात्रि: देवी बीज मंत्रों के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ काल।
- ▸शिवरात्रि: शिव बीज मंत्रों के लिए।
वर्जित काल
संध्या-काल (सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक समय) में अन्य कार्य वर्जित — परंतु संध्या-उपासना स्वयं ही करें।
भोजन के तुरंत बाद जप — पाचन और मंत्र-ऊर्जा का विरोध।





