विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत (5.24.14) में वर्णित है कि अतल लोक के निवासियों की मृत्यु का एकमात्र कारण भगवान का सुदर्शन चक्र है। इसका तात्विक अर्थ अत्यंत गहरा है। सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का काल-रूपी अस्त्र है जो समय और मृत्यु का प्रतीक है। चाहे कोई जीव कितनी भी माया रच ले, कितनी भी शक्ति अर्जित करे, हाटक रस पीकर ईश्वर समझने लगे — परंतु काल से कोई नहीं बच सकता। सुदर्शन चक्र का भय इस सत्य का बोध कराता है कि भौतिक शक्ति और माया सीमित है। असुर वधुओं के गर्भपात का प्रसंग (5.24.15) और भी गहरा है — यह दर्शाता है कि परमेश्वर का भय इतना प्रबल है कि यह अजन्मी पीढ़ी को भी प्रभावित करता है। यह जीव की सम्पूर्ण अशक्तता और ईश्वर की सर्वोच्च शक्ति का सबसे स्पष्ट प्रमाण है।
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