विस्तृत उत्तर
काली मंत्र जप के शुभ समय का वर्णन कालिका पुराण और शाक्त परंपरा में मिलता है:
भक्ति मार्ग के लिए श्रेष्ठ जप काल
1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00–5:36) — सर्वोत्तम
सात्विक वातावरण। मन सर्वाधिक एकाग्र। 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' का जप यहाँ विशेष फलदायी।
2सायंकाल संध्या (शाम 5:30–7:00)
प्रदोष काल में काली स्मरण और आरती।
उपासना मार्ग के लिए
3निशीथ काल (रात्रि 11:30–12:30)
तांत्रिक परंपरा में निशीथ काल काली साधना का महाकाल है। महानिर्वाण तंत्र में इसका उल्लेख है — 'निशीथे काली साधना' सर्वाधिक सिद्धिदायी।
यह केवल दीक्षित साधकों के लिए है।
तिथि और वार अनुसार जप
| अवसर | जप संख्या | महत्व |
|------|-----------|-------|
| अमावस्या | 1008 | सर्वोत्तम |
| कालाष्टमी | 1008 | विशेष |
| शनिवार | 108-1008 | नित्य |
| नित्य | 108 | सामान्य |
वर्जित काल
- ▸राहुकाल में नई साधना आरंभ न करें
- ▸सूतक-पातक में जप केवल मन में
- ▸भोजन के तुरंत बाद जप न करें
श्रेष्ठ क्रम
स्नान → आसन → दीप → आवाहन → जप → आरती → क्षमा
कालिका पुराण का वचन
काल्याः स्मरणमात्रेण पापानि विनश्यन्ति च।' — काली के स्मरण मात्र से पाप नष्ट होते हैं।





