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जप समय📜 शिव पुराण — पूजा समय विधान, धर्म सिंधु, ज्योतिष शास्त्र2 मिनट पठन

शिव मंत्र जप का सही समय क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

शिव मंत्र जप के लिए: ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36) सर्वोत्तम। प्रदोष काल (त्रयोदशी की सायं) शिव का विशेष समय — इस काल में जप महाफलदायी। सोमवार और श्रावण मास में नित्य जप विशेष पुण्यकारी।

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विस्तृत उत्तर

शिव मंत्र जप के शुभ समय का वर्णन शिव पुराण और धर्म सिंधु में मिलता है:

दैनिक शुभ समय

1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36 बजे) — सर्वोत्तम

शिव ध्यान और 'ॐ नमः शिवाय' जप के लिए यह काल श्रेष्ठ है। वातावरण सात्विक और ऊर्जावान होता है।

2प्रदोष काल (सूर्यास्त के लगभग 1.5 घंटे बाद) — शिव का विशेष समय

शिव पुराण में प्रदोष काल को शिव जप के लिए सर्वोत्तम बताया गया है। इस समय शिव नंदी पर सवार होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।

3त्रिसंध्या (तीनों संध्याएं)

प्रातः संध्या, दोपहर और सायं — तीनों समय शिव स्मरण शुभ।

वार के अनुसार

  • सोमवार — शिव का प्रिय दिन; जप विशेष फलदायी
  • शनिवार — नीलकंठ का दिन; शनि दोष के लिए

तिथि के अनुसार

| तिथि | विशेष |

|------|--------|

| प्रदोष (त्रयोदशी) | शिव जप का महाकाल |

| चतुर्दशी | शिवरात्रि |

| पूर्णिमा | चंद्रशेखर का दिन |

| अमावस्या | महेश्वर स्मरण |

मास के अनुसार

  • श्रावण मास — शिव का प्रिय मास; पूरे माह जप विशेष
  • मार्गशीर्ष — ज्ञान जप के लिए
  • फाल्गुन — महाशिवरात्रि; जप का महाकाल

प्रदोष व्रत का विशेष महत्व

शिव पुराण में प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) पर विस्तृत चर्चा है। प्रदोष काल में शिव की पूजा और 'ॐ नमः शिवाय' जप अत्यंत शीघ्र फलदायी है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण — पूजा समय विधान, धर्म सिंधु, ज्योतिष शास्त्र
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