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तिथि और मुहूर्त प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

तिथि और मुहूर्त से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

स्मार्त और वैष्णव लोगों की रथ सप्तमी की तारीख में अंतर क्यों होता है?

तारीख के नियमों में फर्क के कारण ऐसा होता है। स्मार्त लोग सूरज निकलने के समय की तिथि मानते हैं, जबकि वैष्णव नियम के मुताबिक सप्तमी तिथि सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले शुद्ध रूप से शुरू हो जानी चाहिए।

स्मार्तवैष्णववेध नियम
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रथ सप्तमी की पूजा और स्नान का सबसे शुभ समय क्या है?

इस दिन स्नान और पूजा के लिए 'अरुणोदय काल' सबसे शुभ माना जाता है, जो सुबह सूरज निकलने (सूर्योदय) से लगभग डेढ़ घंटे (1 घंटा 36 मिनट) पहले का समय होता है।

अरुणोदय कालशुभ समयस्नान मुहूर्त
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अनंत चतुर्दशी की पूजा का सही समय (मध्याह्न मुहूर्त) क्या होता है?

शास्त्रों के अनुसार, अनंत चतुर्दशी की पूजा हमेशा 'मध्याह्न काल' (दिन के बीच के समय यानी दोपहर) में करनी चाहिए, क्योंकि इसी समय अनंत सूत्र का निर्माण और पूजन किया जाता है।

मध्याह्न व्यापिनीनिर्णयसिन्धुमुहूर्त
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तिथि और मुहूर्त — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तिथि और मुहूर्त श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

तिथि और मुहूर्त को गहराई से समझने का तरीका

तिथि और मुहूर्त प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।