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नित्य कर्म प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

नित्य कर्म से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

भोजन शुद्धि का मंत्र

भोजन ग्रहण करने से पूर्व अन्न के दोषों को नष्ट करने और उसे प्रसाद बनाने के लिए गीता के श्लोक 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ...' का उच्चारण करना चाहिए।

भोजनअन्न दोषशुद्धि
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रात को सोने का मंत्र

बिस्तर पर लेटकर उन पांच महान ऋषियों का स्मरण करना चाहिए जिन्हें सुखपूर्वक सोने का वरदान प्राप्त था। इसके लिए 'अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो...' श्लोक का मानसिक जप सर्वोत्तम है।

निद्राशयनमानसिक शांति
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सुबह उठने के बाद का मंत्र

प्रातःकाल आंख खुलते ही दोनों हथेलियों के दर्शन करते हुए 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः...' श्लोक का उच्चारण करना चाहिए। यह दिनभर के कर्मों में धन, विद्या और सफलता सुनिश्चित करता है।

दिनचर्याप्रातः कालकर दर्शन
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तर्पण और मार्जन के मंत्र और उनकी विधि

तर्पण का अर्थ देवताओं या पितरों को जल देकर तृप्त करना है ('अमुक देवतां तर्पयामि')। मार्जन का अर्थ मंत्रोच्चार के साथ स्वयं पर जल छिड़ककर शारीरिक और सूक्ष्म शुद्धि करना है। दोनों अनुष्ठान के अनिवार्य अंग हैं।

तर्पणमार्जनशुद्धि
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नींद न आने की समस्या के लिए शांति मंत्र

गहरी और शांत नींद के लिए बिस्तर पर लेटकर 'अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो...' श्लोक का मानसिक स्मरण करना चाहिए, जो मन के भटकाव को रोककर तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।

अनिद्राशांति मंत्रनिद्रा
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अन्नपूर्णा मंत्र भोजन से पहले

भोजन से पूर्व 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' मंत्र का उच्चारण करने से अन्न के दोष नष्ट होते हैं, भोजन प्रसाद बन जाता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।

अन्नपूर्णाभोजनकृतज्ञता
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नित्य कर्म — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नित्य कर्म श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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नित्य कर्म को गहराई से समझने का तरीका

नित्य कर्म प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।